Now Ram is also worshiped in Ravana's templeNow Ram is also worshiped in Ravana's temple

Ram Mandir ,उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में ग्रेटर नोएडा से करीबन 15 किमी दूर बसा बिसरख गांव है, जिसे रावण के गांव के रूप में जाना जाता है। कहते हैं कि इसी जगह पर लंकेश का जन्म हुआ था। यही वजह है कि यहां पर न तो दशहरा मनाया जाता है और न ही रावण के पुतले को जलाया जाता है।

Ram Mandir , ऐसा भी कहते हैं कि कई दशक पहले जब इस गांव के लोगों ने रावण के पुतले को जलाया था तो यहां कई लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद गांव के लोगों ने मंत्रोच्चारण के साथ रावण की पूजा की तब जाकर यहां शांति हुई थी। अब ये बात कितनी सच है, ये तो हम नहीं कह सकते, लेकिन हां इस गांव में दशहरा नहीं मनाया जाता है।

नोएडा के बिसरख स्थित लंकापति रावण के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। यहां अखंड रामायण का पाठ होगा। मंदिर में ही राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसके अलावा मंदिर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए तैयारी जोरों पर हैं।

बिसरख में लंकापति रावण मंदिर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को जब अयोध्या में राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे तो रावण का मंदिर भी जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठेगा। नोएडा के बिसरख क्षेत्र में बना मंदिर लंका के राजा रावण को समर्पित है। स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, बिसरख रावण का जन्म स्थान है।

बिसरख में लंकापति रावण के इस मंदिर में भगवान शिव, पार्वती और कुबेर की मूर्तियां भी हैं। रावण मंदिर के पुजारी महंत रामदास ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन मंदिर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए तैयारी जोरों पर हैं।

मंदिर में 14 जनवरी से धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाएगा। इसमें अखंड रामायण से लेकर सुंदरकांड व अन्य अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद इस खुशी में मिठाई भी वितरित करेंगे।

महंत ने कहा कि इस आयोजन को लेकर गांव का हर एक व्यक्ति उत्साहित है और रावण की जन्म स्थली बिसरख में जन्म पाकर अपने आप को धन्य मानता है। उन्होंने कहा कि अगर रावण नहीं होता, तो राम नहीं होते।

भगवान राम ने अवतार नहीं लिया होता तो किसी को भी रावण के बारे में पता नहीं चलता। दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। महंत ने बताया, रात में भी यह मंदिर बंद नहीं होता है। यहां आने वाले भक्त भगवान शिव, कुबेर और यहां तक कि रावण की भी पूजा करते हैं।

Ram Mandir रावण के मंदिर में अब राम की भी पूजा

एक ही मंदिर में विराजेंगे राम-रावण Ram Mandir

बिसरख में प्राचीन रावण मंदिर में राम और रावण एक साथ विराजेंगे। महंत ने बताया कि मंदिर में 22 जनवरी को राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। मंदिर में राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके लिए तैयारी जोरों पर हैं। महंत ने बताया कि वैसे मंदिर में भगवान शिव की अष्टभुजी मूर्ति है। मान्यता है कि इसी शिव की मूर्ति की रावण पूजा अर्चना किया करता था। लेकिन अब इस मंदिर में राम भी विराजेंगे।

मंदिर को विशेष रूप से सजाया जा रहा

प्राण प्रतिष्ठा के लिए रावण मंदिर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। इसकी सजावट के लिए 10 क्विंटल से अधिक फूल कोलकाता से मंगाए गए हैंं। इसके साथ ही मंदिर पर रंग-बिरंगी झालरें भी लगाई जा रही हैं। ग्रामीणों की ओर से इस मंदिर में आयोजन के लिए विशेष सहयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह देश का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां रावण की पूजा भी की जाती है और रावण का नाम आते ही जेहन में राम की सुंदर छवि बन जाती है। यहां अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन भव्य उत्सव का आयोजन किया जाएगा।

मिट्टी के दीयों से लिखेंगे जय श्री राम, जगमगाएंगे घर, द्वार और मंदिर

उधर, राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को यादगार बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, हिंदू युवा वाहिनी सहित विभिन्न हिंदू संगठनों ने पूरी तैयारी कर ली है। घर-घर दीए जलाने के साथ शहर के गामा- वन स्थित श्री गौरी शंकर व अल्फा- वन स्थित शिव मंदिर सहित सभी मंदिराें में 11 हजार तक मिट्टी के दीए जलाए जाएंगे। लोग अपने घरों के मुख्य गेट पर दीए से जय श्रीराम लिखकर अपने आराध्य का स्वागत करेंगे।

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से कुछ ही किलोमीटर दूर बिसरख नाम का गांव है, जहां रावण का जन्म हुआ था। इस गांव के बारे में कहा जाता है कि यहां के लोग दशहरा नहीं मनाते हैं। यही नहीं दशहरा के दिन यहां रावण की पूजा करते हैं, सुबह-शाम पकवान बनाते हैं।

सेक्टर गामा- 1 स्थित श्री गौरी शंकर मंदिर के पुजारी आनंद द्विवेदी ने बताया, 21 फरवरी को अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जाएगा। 22 जनवरी को हवन यज्ञ व भंडारे के आयोजन किया जाएगा। वहीं, अल्फा- 1 स्थित शिव मंदिर के पुजारी प्रकाश शास्त्री ने बताया कि सुंदरकांड के पाठ का आयोजन किया जाएगा। सुबह 10 बजे हवन होगा। शाम को 11 हजार दीए जलाए जाएंगे। बीटा- वन स्थित मंदिर में भी 11 हजार दीए जलाए जाएंगे।

यही नहीं, इस गांव में रावण के बाद कुंभकरण, सूर्पणखा और विभीषण ने भी जन्म लिया था। यही वजह है कि जब पूरे देश में श्री राम की जीत की खुशियां मन रही होती है, तो वहीं इस गांव में रावण की मौत का भी शौक मनाया जाता है। दशहरा के दिन यहां लोग मातम मनाते हैं।

ऐसा कहते हैं कि गांव के लोगों ने यहां दो बार रामलीला का आयोजन किया था और रावण दहन भी यही किया गया था। लेकिन दोनों बार रामलीला के समय किसी न किसी मौत हो गई। इसलिए यहां कभी रावण दहन नहीं होता। अब बिसरख की आत्मा की शांति के लिए हवन किया जाता है। और तो और, नवरात्रि के दौरान शिवलिंग पर बलि पर चढ़ती है।

15 जनवरी को निकाली जाएगी जनजागरण यात्रा

विश्व हिंदू महासंघ (भारत) की ओर से लोगों को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए 15 जनवरी को जनजागरण यात्रा निकाली जाएगी। संगठन के मेरठ प्रभारी बिल्लू प्रधान उर्फ नरेश योगी ने बताया कि ऐच्छर से म्यू, ओमीक्रॉन वन और फिर घोड़ी-बछेड़ा गांव में एक सभा का आयोजन किया जाएगा। जिससे लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सके।

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