Red Ant Chutney Odisha's chutney gets GI tagOdisha's chutney gets GI tag

Red Ant Chutney: खानपान के मामले में भारत दुनियाभर काफी मशहूर है। यहां के व्यंजनों को लोग देश ही नहीं विदेश में भी काफी पसंद करते हैं। इसी क्रम में हाल ही में यहां के एक व्यंजन ने जीआई टैग हासिल किया है। ओडिशा की लाल चींटी की चटनी को हाल ही में जीआई टैग मिला है। इस चटनी को ओडिशा के अलावा झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी खाया जाता है।

Red Ant Chutney: बात जब भी खानपान की हो, तो भारत का जिक्र जरूर होता है। यहां मिलने वाले कई व्यंजन देश ही नहीं, विदेश में भी बड़े शौक से खाए जाते हैं। भारत अनेकता में एकता का देश है, जहां रहन-सहन, बोली और पहनावा भी नहीं बल्कि खानपान भी काफी अलग है। यहां हर राज्य और शहर का अपना अलग स्वाद है। यही वजह है कि यहां मिलने वाले पकवानों को दुनियाभर में काफी पसंद किया जाता है। इसी बीच अब भारत का एक और व्यंजन इस समय चर्चा में बना हुआ है।

भारत विभिन्न संस्कृतियों के साथ ही विभिन्न व्यंजनों का भी देश है। यहां हर कुछ किलोमीटर पर खाने का स्वाद, खासियत और पौष्टिकता बदल जाती है। भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा है चटनियां। आपने चटनियां तो कई प्रकार की खाई होंगी, धनिए की चटनी, पुदीने की चटनी, लहसुन की चटनी, टमाटर की चटनी, नारियल की चटनी आदि, लेकिन क्या आपने कभी ‘चींटी की चटनी’ खाई है। जी हां, ये कोई टाइपिंग एरर नहीं है, आप एक दम सही पढ़ रहे हैं, हम ‘चींटी की चटनी’ की ही बात कर रहे हैं।

दिमाग चकरा देने वाली यह खास चटनी Red Ant Chutney बनाई जाती है ओडिशा में

दिमाग चकरा देने वाली यह खास चटनी बनाई जाती है ओडिशा में। यहां के मयूरभंज जिले में लाल बुनकर चींटियों की स्पेशल चटनी बनाई जाती है। इस चटनी को ‘काई चटनी’ भी कहा जाता है। यह चटनी अपने औषधीय और पौष्टिक गुणों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। हाल ही में इस चटनी के इन्हीं गुणों को देखते हुए इसे ज्योग्राफिकल आइडेंटीकेशन या जीआई टैग देकर सम्मानित किया गया है। चलिए जानते हैं आखिर क्या है लाल चींटियों से बनने वाली इस चटनी की खासियत।

इस खास चटनी को मिला जीआई टैग

हाल ही में भारत के ओडिशा राज्य में स्थित मयूरभंज जिले में मशहूर लाल चींटी की चटनी को जीआई टैग मिला है। अगर आपको लग रहा है कि आपने कुछ गलत पढ़ा या सुना है, तो बता दें कि आप पूरी तरह सही है। हम यहां लाल चींटी से बनी चटनी की ही बात कर रहे हैं। इस चटनी को काई चटनी भी कहा जाता है, जिसने

2 जनवरी, 2024 को अपने विशिष्ट स्वाद के भौगोलिक संकेत यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग हासिल किया है। आइए जानते है इस खास चटनी के बारे में दिलचस्प बातें-

यहां भी खाई जाती है चींटी की चटनी

सुनने में अजीब इस चटनी के लिए इस जिले के सैकड़ों आदिवासी परिवार इन कीड़ों और को इकट्ठा करके और बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं। ओडिशा के अलावा यह चटनी अन्य पूर्वी राज्यों जैसे झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लोग बड़े चाव से खाते हैं। इसके बनाने के लिए चींटियों और उनके अंडों को उनके बिल या बांबी से इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद इसकी चटनी बनाने के लिए पहले इन्हें साफ किया जाता है और फिर पीसकर सुखाया जाता है।

ऐसे तैयार होती है चटनी

इसके बाद इसमें नमक, अदरक, लहसुन और मिर्च मिलाकर दोबारा पीसा जाता है और इस तरह लाल चींटी की चटनी तैयार की जाती है। यह स्वाद में बेहद तीखी होती है। स्वादिष्ट होने के साथ ही यह चटनी कई स्वास्थ्य लाभों के भी जानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस चटनी में प्रोटीन, कैल्शियम, जिंक, विटामिन बी-12, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो इसे सेहत के लिए फायदेमंद बनाते हैं। जिले के सैकड़ों आदिवासी परिवार अपने बुजुर्गों की पारंपरिक विधियों का उपयोग करके चींटियों की चटनी का निर्माण करते हैं। सबसे पहले लाल बुनकर चींटियों और उनके अंडों को एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इन्हें साफ किया जाता है। चटनी बनाने के लिए इसमें चींटियों के साथ नमक, लहसुन, मिर्च और अदरक डालकर पीसा जाता है।

लाल चींटी की चटनी आदिवासी परिवारों की है परंपरा

काई चटनी का मुख्य बेस लाल बुनकर चींटियां होती हैं। इन चींटियों का वैज्ञानिक नाम ओकोफिला स्मार्गडीना है। इन चीटियों का डंक बेहद दर्दनाक होता है। अगर ये किसी को काट लें तो पूरी त्वचा पर फफोले पड़ सकते हैं। ये खास किस्म की चींटियां ओडिशा के मयूरभंज जिले के घने जंगलों, खासकर कि सिमिलिपाल जंगल में मिलती हैं। ये जंगल एशिया का दूसरा सबसे विशाल जीवमंडल का निर्माण करते हैं। इन जंगलों में सदियों से रहने वाले आदिवासी परिवार जंगल में मिलने वाले कीड़ों से चटनियां बनाते हैं, ये उनकी परंपरा का अहम हिस्सा है। औषधीय गुणों के कारण अब ये लोग इन चटनियों को बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। ओडिशा के साथ ही झारखंड और छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में भी चींटियों की चटनी बनाई जाती है।

लाल चींटी की चटनी के फायदे

विभिन्न शोध बताते हैं पशु प्रोटीन की जगह कीड़ों का सेवन करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लाल चींटियों से बनी इस चटनी में भरपूरी मात्रा में प्रोटीन, जिंक, कैल्शियम, विटामिन बी12, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम आदि पाए जाते हैं। यह शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। इससे न सिर्फ आपका तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है, बल्कि यह मस्तिष्क को भी तेज बनाती है। इसे खाने से आपका तनाव और थकान कम होती है। यह आपकी याददाश्त को बढ़ाने में भी मददगार है। यह चटनी आंखों की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है, इससे आंखों की रोशनी तेज होती है। इसका सेवन जुकाम, खांसी, जोड़ों का दर्द, पीलिया आदि को भी दूर करने में मददगार है।

Red Ant Chutney
Photo Credit Rakesh Pandey
शेयर करने के लिए धन्यवाद